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भाषा किसे कहते है? Bhasha Kise Kahate Hain | भाषा के प्रकार, रूप, अंग आदि

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हिंदी व्याकरण में भाषा किसे कहते हैं ? जिस वाणी के जरिए हम एक दूसरे को अच्छे से समझ और समझा पाते हैं, उसे भाषा कहते हैं। आपको नीचे इस विषय पर पूरा जानकारी मिल जाएगा।

इस पेज पर, यह जानकारी लिखा है

भाषा किसे कहते हैं (Bhasha Kise Kahate Hai)

हिंदी व्याकरण में भाषा किसे कहते हैं? (hindi grammar me bhasha kise kahate hain hindi mein) ‘भाषा’ शब्द संस्कृत की ‘भाष्’ धातु से बना है। ‘भाष्’ का अर्थ है, ‘वाणी’। इस प्रकार, जो वाणी से व्यक्त हो, वह भाषा है।

➢ राजू ने अपने दोस्त पिंटू से कहा, “क्या तुम मेरे साथ दिल्ली चलोगे?”

➢ पिंटू ने उत्तर दिया, “हां दोस्त! अवश्य चलूंगा। मैं वहां लालकिला, कुतुबमीनार तथा जंतर-मंतर देखना चाहता हूं। अगर समय मिला तो चिड़ियाघर भी देखूंगा।”

➢ राजू ने अपने दोस्त से कहा, “अच्छा, तो तुम जल्दी तैयार हो जाओ।”

उपयुर्क्त वाक्यों को पढ़ने से मालूम होता है कि यह दो दोस्तों की बातचीत है। दोनों दोस्तों ने अपने मन के भावों तथा विचारों को प्रकट करने के लिए जिस साधन विशेष का प्रयोग किया है उसे ही भाषा कहते हैं। 

अथवा विद्वानों के अनुसार

👉🏾 भाषा किसे कहते हैं ― कुछ विद्वान भाषा को केवल विचारों को प्रकट करने तथा ग्रहण करने का साधन ही नहीं मानते, बल्कि इसे एक ‘मानसिक प्रक्रिया’ भी मानते हैं। उनके अनुसार मानसिक प्रक्रिया को पूरा करने के लिए जिस साधन का प्रयोग किया जाता है, उसे भाषा कहते हैं।

अथवा

👉🏾 भाषा की परिभाषा इस प्रकार दी जा सकती है ― जिस साधन के द्वारा मनुष्य अपने मन के भावों या विचारों को दूसरों पर प्रकट कर सकता है तथा दूसरों के भावों और विचारों को समझ सकता है, उसे भाषा कहते हैं। इस संसार में अनेक भाषाएं हैं जैसे– हिंदी, इंग्लिश, जर्मन, फ्रेंच, जापानी, अरबी आदि।

भाषा क्या है ? (Bhasha kya hai)

जितने भी प्राणी या जीव-जंतु हैं, सभी अपने भावों को किसी न किसी रूप में अवश्य प्रकट करते हैं। भावों की अभिव्यक्ति मुख से बोलकर, लिखकर या संकेतों के माध्यम से होती है। जीवों में मनुष्य सर्वाधिक बुद्धिमान जीव है। अतः वह प्रत्येक ध्वनि का एक निश्चित अर्थ जानता है और उसका उपयोग करता है। इस प्रकार हम कह सकते हैं :–

भाषा वह साधन है जिसके माध्यम से हम अपने भावों को दूसरों पर प्रकट करते हैं और दूसरों के भावों को समझते हैं। उदाहरण :-

(1) अध्यापक ने कक्षा में ‘कबीर’ शीर्षक कविता पढ़ाई।

(2) छात्रों ने मन लगाकर पाठ पढ़ा। 

(3) अध्यापक ने कठिन शब्दों का अर्थ पूछा। 

(4) सभी छात्रों ने समझ कर उत्तर दिया। 

इन वाक्यों को देखा जाए तो लगेगा कि अध्यापक ने अपने भावों को व्यक्त किया। छात्रों ने समझ कर उत्तर दिया। अर्थात अध्यापक तथा छात्रों में भावों, विचारों का आदान-प्रदान हुआ। इस आदान-प्रदान की क्रिया में जो माध्यम है, वही भाषा है। अतः सार्थक शब्दों के समूह को हम भाषा कह सकते हैं।

भाषा के संबंध में ये 3 बातें विचारणीय हैं :―

1) भाषा ध्वति संकेत है - यह संकेत स्पष्ट होना चाहिए। केवल संकेत भाषा का स्थान नहीं ले सकता। 

2) भाषा आदि संकेत है - किसी वस्तु या प्राणी शब्द जैसे - पुस्तक, थाली, कुत्ता, घोड़ा आदि को पुस्तक, थाली, कुत्ता, घोड़ा क्यों पुकारा जाता है, बतलाना कठिन है। इनको आदिकाल से समाज ने स्वीकार कर लिया है। 

3) भाषा के ध्वनि संकेत रूढ़ हैं - वस्तुओं, प्राणियों ध्वनियों आदि का प्रयोग परंपरागत चला आ रहा है। इसका प्रयोग क्यों होता है, इसका कोई कारण नहीं है।

भाषा की आवश्यकता क्यों होती है (Bhasha ki Avashyakta)

मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है। उसे समाज में रहते हुए जीवन की विभिन्न आवश्यकताओं को पूरा करना होता है, इसलिए उसे कभी अपने मन के विचारों को प्रकट करना पड़ता है तो कभी दूसरों के विचारों को समझना पड़ता है। भाषा ना केवल विचारों तथा भावों को प्रकट करने का महत्वपूर्ण साधन है, बल्कि ज्ञान के भंडार को सुरक्षित रखने का भी साधन है। भाषा द्वारा विचारों में सरलता स्पष्ट और एकरूपता आती है।

भाषा के कितने प्रकार या भेद होते हैं? (bhasha ke kitne prakar ya bhed hote hain)

मनुष्य भाषा का प्रयोग निम्नलिखित तीन प्रकार से कर सकता है ―

(क) मौखिक भाषा में (बोलकर)

(ख) लिखित भाषा में (लिखकर) तथा

(ग) सांकेतिक भाषा में (इशारा करके)। आगे सब विस्तार से बतलाया गया है –

(क) मौखिक भाषा किसे कहते हैं (maukhik Bhasha Kise Kahate Hain)

भाषा का वह रूप, जिसे मनुष्य अपने मुख से बोलता है और अपने कानों से सुनता है, मौखिक भाषा है।

अथवा

जब दो या दो से अधिक व्यक्तियों द्वारा अपने मन के विचारों को बोलकर प्रकट किया जाता है तो इसे भाषा का मौखिक रूप कहते हैं।

(ख) लिखित भाषा किसे कहते हैं (Likhit Bhasha Kise Kahate Hain)

भाषा का वह रूप, जहां मनुष्य अपने भावों को लिखकर अथवा दूसरों के भावों को पढ़कर समझता और समझाता है, लिखित भाषा है। यही भाषा का वास्तविक रूप है।

अथवा

व्यक्ति द्वारा अपने विचारों को शब्दों या वाक्य के माध्यम से लिखित रूप में व्यक्त करना भाषा का लिखित रूप कहलाता है। भाषा का लिखित रूप पत्रों समाचार-पत्रों और पुस्तकों आदि में देखने को मिलता है। (आजकल अधिकतर मोबाइलों में भाषा का लिखित रूप व्हाट्सएप और टेलीग्राम पर देखा जाता है)

(ग) सांकेतिक भाषा किसे कहते हैं (sanketik Bhasha Kise Kahate Hain)

भाषा का वह रूप, जहां हाथों, आंखों, झंडी आदि के संकेतों द्वारा अपनी बात दूसरों तक पहुंचाई जाती है, सांकेतिक भाषा है।

अथवा

संकेत द्वारा जिन भाव को प्रकट करने का प्रयत्न किया जाता है, जैसे भूख लगने पर बच्चा रोता है। गूंगे संकेतों द्वारा ही अपने मन के भावों को प्रकट करने का कार्य करते हैं। ऐसे रूप को भाषा का सांकेतिक रूप कहते हैं। लेकिन ये बात जरूर याद रखें की व्याकरण में भाषा के लिखित रूप पर ही विचार किया जाता है।

भाषा के कितने रूप होते हैं (bhasha ke kitne Roop Hote Hain)

भाषा के विविध रूप है जिनमें से तीन ज्यादा प्रचलित रूप है ―

1) बोली या विभाषा – बोली भाषा का वह रूप है जिसे हम अपने घरों में बोलते हैं। इसका क्षेत्र संकुचित होता है और इसका साहित्यिक प्रयोग नहीं होता। 

विभाषा का क्षेत्र बोली से विस्तृत होता है। इसका स्वरूप व्यवस्थित होता है। किसी प्रांत या उपप्रान्त की बोली को विभाषा कहा जाता है। इसका रूप साहित्यिक होता है। ब्रजभाषा, अवधी आदि पहले बोलियां थी, अब विभाषा का रूप ग्रहण कर चुकी है।

2) आदर्श भाषा – यह भाषा का आदर्श या मानक रूप होता है। इसका प्रयोग सरकारी काम-काज, साहित्य तथा शिक्षा जगत में होता है। हिंदी, अंग्रेजी, चीनी आदि इसी प्रकार की भाषाएं हैं।

3) राष्ट्रभाषा – जो भाषा प्रांत या उपप्रान्त की सीमा को पारकर पूरे देश को भावनात्मक एकता में बांधती है, उसे राष्ट्रभाषा कहते हैं। प्रत्येक राष्ट्र की एक राष्ट्र भाषा होती है। जैसे की भारतीय संविधान ने हिंदी भाषा को राष्ट्रभाषा के रूप में स्वीकार किया है।

हिंदी भाषा के अंग या आधार

भाषा के तीन मुख्य अंग या आधार हैं – ① वर्ण . ② शब्द. ③ वाक्य। तीनों का एक दूसरे से अटूट संबंध है। ध्वनियों के मेल से अक्षर बनते हैं। अक्षरों का लिखित रूप वर्ण कहलाता है। वर्णों के मेल से शब्द और सार्थक शब्दों के मेल से वाक्य का निर्माण होता है। सार्थक वाक्यों के समहू को भाषा कहते हैं।

संपर्क भाषा किसे कहते हैं (Sampark Bhasha Kise Kahate Hain)

संपर्क भाषा वह भाषा होती है जिसका उपयोग विभिन्न भाषाएँ बोलने वाले लोग आपसी संवाद और समझ बनाने के लिए करते हैं। यह भाषा उनके लिए एक सेतु की तरह कार्य करती है। 

भारत में हिंदी को संपर्क भाषा के रूप में देखा जाता है, क्योंकि यह देश के विभिन्न राज्यों के लोगों को जोड़ने का माध्यम है। इसी तरह, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अंग्रेजी संपर्क भाषा का कार्य करती है। 

संपर्क भाषा व्यापार, शिक्षा, प्रशासन और सामाजिक सहयोग में सहूलियत प्रदान करती है और सांस्कृतिक और भाषाई विविधता के बीच पुल का काम करती है। इसके माध्यम से अलग-अलग भाषाओं और संस्कृतियों के लोग एक-दूसरे से आसानी से जुड़ सकते हैं।

लक्ष्य भाषा किसे कहते हैं (Lakshya Bhasha Kise Kahate Hain)

यह भाषा वह भाषा होती है जिसे कोई व्यक्ति या समूह सीखने या समझने का प्रयास करता है। यह आमतौर पर उस भाषा को कहते हैं जो किसी अनुवाद, अध्ययन या व्यावहारिक उपयोग के लिए चुनी जाती है। उदाहरण के लिए, यदि कोई हिंदी भाषा जानने वाला आदमी अंग्रेजी सीखना चाहता है, तो अंग्रेजी उसकी लक्ष्य भाषा होगी। इसी प्रकार, अनुवाद के संदर्भ में, जिस भाषा में पाठ का अनुवाद किया जाता है, वह लक्ष्य भाषा कहलाती है।

संचार भाषा किसे कहते हैं (Sanchar Bhasha Kise Kahate Hain)

संचार भाषा वह माध्यम है जिससे दो या अधिक व्यक्ति अपने विचार, भावनाएँ या जानकारी एक-दूसरे तक पहुँचाते हैं। यह केवल शब्दों तक सीमित नहीं होती, बल्कि इसमें लिखित सामग्री, इशारे, हावभाव और तकनीकी साधन भी शामिल हो सकते हैं। जब कोई व्यक्ति किसी संदेश को सरल और प्रभावी तरीके से दूसरों तक पहुँचाने के लिए किसी भी भाषा या माध्यम का उपयोग करता है, तो वह संचार भाषा कहलाती है। उदाहरण के लिए, मूक-बधिरों के लिए सांकेतिक भाषा, व्यापार में ईमेल या दैनिक बातचीत में हिंदी, अंग्रेज़ी या अन्य क्षेत्रीय भाषाएँ संचार भाषा के अलग-अलग रूप हैं। इसका उद्देश्य स्पष्टता और आपसी समझ को बढ़ाना है।

राजभाषा किसे कहते हैं (rajbhasha Kise Kahate Hain)

यह वह भाषा है जिसे सरकार अपने सभी कामों के लिए इस्तेमाल करती है। जैसे स्कूल में सभी बच्चे एक ही भाषा में पढ़ाई करते हैं ताकि सब कुछ समझ सकें, वैसे ही सरकार भी एक भाषा चुनती है ताकि देश के लोग उसके कामकाज को समझ सकें। 

भारत में हिंदी हमारी राजभाषा है, जिसे देवनागरी लिपि में लिखा जाता है। इसके अलावा, अंग्रेज़ी को भी सरकारी कामों में मदद के लिए इस्तेमाल किया जाता है। हर राज्य में अलग-अलग भाषाएँ भी राजभाषा हो सकती हैं, जैसे महाराष्ट्र में मराठी और बंगाल में बांग्ला। राजभाषा का मतलब है कि सरकार उसी भाषा में लिखती और बोलती है ताकि लोगों को उसके फैसले और नियम समझने में आसानी हो।

स्रोत भाषा किसे कहते है

स्रोत भाषा वह भाषा होती है जिसमें कोई बात सबसे पहले लिखी या कही जाती है, और फिर उसे दूसरी भाषा में बदलने की जरूरत होती है। आसान भाषा में समझें तो, अगर कोई कहानी हिंदी में लिखी है और उसे अंग्रेजी में अनुवाद करना है, तो हिंदी स्रोत भाषा कहलाएगी। यह इसलिए जरूरी है कि जो बात पहली भाषा में कही गई है, उसका सही मतलब दूसरी भाषा में भी समझाया जा सके। स्रोत भाषा का सही ज्ञान होना जरूरी है ताकि किसी भी जानकारी या कहानी का भाव और अर्थ दूसरी भाषा में भी ठीक से समझ आए।

हिंदी व्याकरण भाषा किसे कहते हैं (Hindi bhasha Kise Kahate Hain)

भाषा वह माध्यम है जिसके द्वारा हम अपने विचार, भावनाएँ और जरूरतें दूसरों तक पहुँचाते हैं। यह बोलने, लिखने या इशारों के जरिए हो सकती है। जैसे, जब हम कहते हैं "मुझे खाना चाहिए," तो यह हमारी जरूरत को व्यक्त करने का तरीका है। हिंदी व्याकरण भाषा के इन्हीं नियमों और शुद्धता को समझने का आधार है। व्याकरण हमें सिखाता है कि शब्दों, वाक्यों और ध्वनियों का सही प्रयोग कैसे किया जाए, ताकि भाषा का अर्थ और भाव स्पष्ट रहे। हिंदी व्याकरण भाषा को सरल, सुगठित और समझने योग्य बनाने में मदद करता है, जिससे हम अपने विचार सही ढंग से व्यक्त कर सकें।

भाषा के अन्य प्रश्न उत्तर

(क) हिंदी भाषा किस भाषा से उत्पन्न हुई है?

उत्तर → इस लेख की शुरुआत में ही इसका जवाब दिया हुआ है, हिंदी भाषा संस्कृत की भाषा से उत्पन्न हुई है।

(ख) रिक्शा शब्द किस भाषा का है?

उत्तर → यह शब्द जापानी भाषा का है। जो कि जिनरिकिशा" (人力車) शब्द से बना है। धीरे-धीरे यह शब्द हिंदी और अन्य भाषाओं में प्रचलित हुआ।

(ग) दुकान, चाकू, तंबाकू, अलमारी, खाना किस भाषा का शब्द है?

उत्तर → दुकान फारसी, चाकू तुर्की, तंबाकू स्पेनिश, अलमारी पुर्तगाली एवं खाना संस्कृत भाषा के शब्द हैं।

(घ) घरेलू बोलचाल की भाषा और राष्ट्रभाषा में अंतर बताइए?

उत्तर → गांव, घर में बोले जाने वाले भाषा को घरेलू भाषा कहते हैं। यह एक क्षेत्र या परिवार तक सीमित होता है, जबकि राष्ट्रभाषा पूरे देश में बातचीत और पहचान का माध्यम होता है।



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